वीर बलिदानी बाबू वीर कुंवर सिंह महान स्वतंत्रता सेनानियों की बदौलत आज देश आज़ाद है : रामरंजन

बाबू वीर कुंवर सिंह की स्मृति में आयोजित विजयोत्सव कार्यक्रम में शामिल हुए श्री गुरूदेव कोचिंग सेंटर सह नवीन युग विद्यालय, पाकुड़ के छात्र-छात्रा

पाकुड़ |  महानायक बाबू वीर कुंवर सिंह की स्मृति में श्री गुरुदेव कोचिंग सेंटर, पाकुड़ के परिसर  में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर श्री सारस्वत स्मृति के अध्यक्ष भागीरथ तिवारी ने शामिल होकर उनकी प्रतिभा पर माल्यार्पण कर श्रद्धा सुमन अर्पित किया।

इस मौके पर  भागीरथ तिवारी ने कहा कि 23 अप्रैल, 1858 को अपने गांव जगदीशपुर के किले पर फतह पाई थी और ब्रिटिश झंडे को उतारकर अपना झंडा फहराया था। यही वजह है कि 23 अप्रैल का दिन उनके विजयोत्सव के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने जो हिम्मत और साहस का परिचय दिया, वह इतिहास के पन्नों में दर्ज है। उनके अंदर नेतृत्व की अद्भुत क्षमता थी। बाबू वीर कुंवर सिंह ने ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध अद्भुत वीरता और आन बान के साथ लड़ाई लड़ने का काम किया था। गनीमत थी कि युद्ध के समय वीर कुंवर सिंह की उम्र 80 के करीब थी, अगर वह जवान होते तो शायद अंग्रेजों को 1857 में ही भारत छोड़ना पड़ता।

इस मौके पर रामरंजन कुमार सिंह ने कहा कि हमें अपना इतिहास सदैव याद रखना चाहिये। इतिहास से सीख लेनी चाहिये और इतिहास गढ़ने की भी कल्पना करनी चाहिये।जब तक सूरज और चन्द्रमा रहेगा, तब तक बाबू वीर कुँवर सिंह की कृति रहेगी।

मस्ती की थी छिड़ी रागणी, आजादी का गाना था।

सब कहते हैं कुँवर सिंह भी बड़ा वीर मर्दाना था।


कोचिंग सह विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने बाबू वीर कुँवर सिंह की जयन्ती पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर नमन किया।

राजकुमार भगत की रिपोर्ट

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