Success story - पी0 वी0 टी0 जी0 पाठशाला से असुरक्षित जनजातिय परिवार के बच्चों के सपने ले रहा उड़ान


पाकुड़ । शिक्षा संविधान के समवर्ती सूची में शामिल है। इस पर केंद्र और राज्य सरकारें दोनों प्रयास कर सकती हैं। साथ ही शिक्षा ही वह अमोख हथियार है जो सभ्य समाज का निर्माण करता है। इसीलिए शिक्षा सर्व सुलभ होना ही चाहिए।

बात हो रही है, पाकुड़ जिले की जो झारखंड का सबसे कम साक्षरता वाला जिला है। साथ ही साथ यह आदिम जनजाति बहुलता वाला जिला भी है। यहां के ये जनजातियां आज भी जंगल पहाड़ों में निवास करती हैं, और आधुनिक चकाचौंध से दूर रहती है। लोक कल्याणकारी राज्य में सभी वर्गों का समग्र विकास करना सरकार का प्राथमिक और मौलिक कर्तव्य भी है। 

असुरक्षित जनजातिय समूह (पी0वी0टी0जी0) के बच्चों को पढ़ाई से जुड़ना एक स्वप्नलोक की कोरी कल्पना जैसा है, परंतु बच्चों के मन मस्तिक में यदि शिक्षा का महत्व जगा दिया जाए, उनमें शिक्षा का भूख उत्पन्न कर दिया जाए, तो यह समाज भी स्वय को मुख्यधारा में जोड़ कर राष्ट्रीय निर्माण में अपना योगदान दे सकती हैं, इन्हीं कल्पना को हकीकत में बदलने का  सार्थक प्रयास जे0एस0पी0एस0 के अंतर्गत उड़ान परयोजना के द्वारा पी0वी0टी0जी0 पाठशाला के माध्यम से किया जा रहा है।

परियोजना का उद्देश सुदूर गांव, जंगल एवं कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में रहने वाले विशिष्ट असुरक्षित जनजातिय समूह के बच्चों को स्कूल में दाखिला कराने, में निशुल्क बुनियादी शिक्षा को मजबूत करने तथा पढ़ने-लिखने की आदत और रुचि पैदा करने का प्रयास करना है।

इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए ग्रामीण विकास विभाग अंतर्गत झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी की पहल पाकुड़ सदर प्रखंड में दिखाई देने लगी है। पाकुड़ सदर प्रखंड में लगभग 700 पी0वी0टी0जी0 परिवार रहते हैं। इन समूहों की अपनी सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान है। पाकुड़ सदर प्रखंड में 5 पी0वी0टी0जी0 पाठशाला का संचालन ग्राम स्तर पर किया जा रहा है। इनमें लगभग 102 जनजातीय परिवार के बच्चे पढ़ रहे हैं।पी0वी0टी0जी0 पाठशाला में पढाने का कार्य पी0वी0टी0जी0 बदलावकर्ता करते हैं । ए बदलावकर्ता भी उसी समुदाय से होते हैं। इनका चयन गांव में मौजूद पी0वी0टी0जी0 समूह के बीच से ही किया जाता है, ताकि बच्चों को पढ़ाई में सहूलियत हो। यह बदलावकर्ता प्रतिदिन सुबह-शाम पाठशाला का आयोजन कर बच्चों को बुनियादी निशुल्क शिक्षा प्रदान करते हैं। कोरोना महामारी के इस कठिन दौर में पी0वी0टी0जी0 मील का पत्थर साबित हो रहा है। 

पाकुड़ जिला प्रशासन इस दिशा में संवेदनशील है। उपायुक्त वरुण रंजन खुद इसमें बदलावकर्ता समूह का उत्साह वर्धन करते हैं। इनका प्रशिक्षण भी सूचना भवन पाकुड़ के सभागार में कराया जाता है। अतः यह कदम इन पी0वी0टी0जी0 बच्चों के सुनहरे भविष्य निर्माण में मील का पत्थर साबित हो रहा है।


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